Monday, 17 July 2017

ज़ोंबी फिल्मों के पितामह रोमेरो का देहांत

ज़ोंबी फिल्मों के पितामह जॉर्ज ए रोमेरो का कल निधन हो गया। उनकी कम बजट की नाईट ऑफ़ द लिविंग डेड और डॉन ऑफ़ द डेड जैसी फिल्मों के ज़ोंबी यानि चलते फिरते मुर्दों ने दुनिया के दर्शकों को दशकों तक दहलाया। मृत्यु के समय वह ७७ साल के थे।  वह कैंसर से पीड़ित थे।  पिट्सबर्ग के लेखक-निर्देशक रोमेरो ने १९६८ में केवल १ लाख १४ हजार डॉलर के बजट से नाईट ऑफ़ द लिविंग डेड का निर्माण किया था । गांव के फार्महाउस में ज़ोम्बियों से घिर गए सात दोस्तों की कहानी वाली इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर ३० मिलियन डॉलर का ग्रॉस किया।  इसके बाद तो ज़ोंबी फिल्मों और टीवी शो का सिलसिला चल निकला।  लेकिन, इस फिल्म के कारण वह कॉपीराइट एक्ट के लफड़े में फंस गए।  इसके फलस्वरूप उन्हें न केवल अपने मुनाफे से हाथ धोना पड़ा, बल्कि ज़ोंबी फिल्मों से दूरी भी बनानी पड़ी।  इस दौरान उन्होंने देयर इज ऑलवेज वनीला, हंगरी वाइव्स और द क्रैजीज जैसी फ़िल्में बनाई।  उन्होंने डौन ऑफ़ द डेड से पुनः वापसी की।
सीक्वल फिल्म डौन ऑफ़ द डेड (१९७८) के निर्माण में १.५ मिलियन डॉलर खर्च हुए थे। फिल्म ने ५५ मिलियन डॉलर कमाए।  इसके बाद रोमेरो ने डे ऑफ़ द डेड, लैंड ऑफ़ द डेड, आदि फिल्मों का लेखन निर्देशन किया।  इन फिल्मों ने रोमेरो को फादर ऑफ़ द ज़ोंबी फिल्म का खिताब दिया।  उन्होंने १९९० में रिलीज़ नाईट ऑफ़ द लिविंग डेड को लिखा।  इसे टॉम सविनि ने निर्देशित किया था।  जैक स्नाइडर ने २००४ में रोमेरो की फिल्म डौन ऑफ़ द डेड का रीमेक बनाया। कुछ स्कॉलर्स का मानना है कि रोमेरो की फिल्मों में सैन्य शक्तियों और भौतिकवाद पर निशाना साधती हैं। रोमेरो की ज़्यादातर फिल्मों की शूटिंग पिट्सबर्ग में हुई है।  दिलचस्प बात यह है कि जॉर्ज ए रोमेरो अपनी मृत्यु से पहले अपनी पत्नी और बेटी के साथ अपनी पसंदीदा फिल्म द क्वाइट मैन का संगीत सुन रहे थे। 

No comments:

Post a Comment