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Friday 21 February 2020

विवादों के घेरे मे ट्राइलॉजी Mister India !


सोमवार को, अली अब्बास ज़फर ने अपने ट्विटर एकाउंट्स से ज़ी स्टूडियोज के साथ मिल कर मिस्टर इंडिया ट्राइलॉजी बनाने का ऐलान किया था। इसके साथ ही यह ट्राइलॉजी विवाद में फस गई लगती है। १९८७ की फिल्म  मिस्टर इंडिया के निर्देशक शेखर कपूर ने इसे यह कह कर आवाज़ दी कि मुझसे किसी ने कुछ नहीं बताया।  मिस्टर इंडिया के क्रिएटर और लेखक से अनुमति लिए बिना इस चरित्र  का कोई कैसे उपयोग कर सकता  है !

अदृश्य हो जाने वाला मिस्टर इंडिया
मिस्टर इंडिया, १९८७ में रिलीज़ एक आम आदमी के अदृश्य हो कर, देश के दुश्मनों से लोहा लेने के कथानक पर फिल्म थी । इस फिल्म का एक एक हिस्सा आइकोनिक है । फिल्म का टाइटल मिस्टर इंडिया अपने आप में अनोखा है । एक गैजेट पहन कर अदृश्य हों जाने वाला चार्ली चैपलिन टाइप का आम आदमी अरुण, पत्रकार और मिस्टर इंडिया की मददगार सीमा, अरुण का दोस्त कैलेंडर और इन सबसे ऊपर मोगाम्बो ! यह सभी अपने आप में अनोखे और मौलिक हैं ।

बोनी कपूर का क्रिएशन नहीं मिस्टर इंडिया  
मिस्टर इंडिया का निर्देशन शेखर कपूर ने किया था । फिल्म की कथा-पटकथा सलीम-जावेद की जोड़ी ने लिखी थी । फिल्म में अनिल कपूर, श्रीदेवी, सतीश कौशिक और अमरीश पूरी ने उपरोक्त भूमिकाये की थी । मिस्टर इंडिया के मिस्टर इंडिया तथा दूसरे किरदारों के एक्टरों को बदला जा सकता है । इसके बावजूद उसे रिक्रिएट करने का अधिकार सिर्फ निर्माता बोनी कपूर के हाथों में नहीं है । शेखर कपूर ने इसी तथ्य को बताने की कोशिश की है ।

रिबूट है अली का मिस्टर इंडिया
लेकिन, अली अब्बास ज़फर, जी स्टूडियोज और बोनी कपूर, मिस्टर इंडिया का रीमेक यह स्पिन-ऑफ नहीं बनाने जा रहे हैं । वह इस फिल्म को रिबूट करेंगे । बेशक कहानी को आज के सन्दर्भ में देखा और लिखा जाएगा । लेकिन, मुख्य किरदार तो मिस्टर इंडिया ही होगा ! अली, मिस्टर इंडिया को एक आम आदमी के असीम शक्ति पा लेने की कहानी बताते है ।

शाहरुख़ खान की मोगाम्बो को न !

यह फिल्म ट्राइलॉजी होगी । खबर थी कि अली अब्बास ज़फर ने फिल्म में मोगाम्बो की भूमिका के लिए शाहरुख़ खान से संपर्क किया था । लेकिन, खान ने इनकार कर दिया । अब रणवीर सिंह के मिस्टर इंडिया बनने की खबर कहाँ तक सच्ची है, कहा नहीं जा सकता !  

Friday 5 January 2018

रील लाइफ और रियल लाइफ की नर्गिस

फिल्म रात और दिन में नरगिस 
आजकल, पूर्व फिल्म अभिनेत्री स्वर्गीय नर्गिस का नाम फिर चर्चा में हैं। यह चर्चा, उन फिल्मों के कारण हैं, जो निर्माणाधीन हैं। यह फ़िल्में नर्गिस को रियल लाइफ और रील लाइफ में दिखाने वाली फ़िल्में हैं। यों, किसी फिल्म के रीमेक को, उसके एक्टर्स का रीमेक नहीं कहा जा सकता। लेकिन, नर्गिस अपने आप में एक लीजेंड एक्ट्रेस हैं। वह खुद ऐसा किरदार बन गई हैं, जो बाद की एक्ट्रेस के लिए राह दिखाने का काम करता है। बहरहाल, बात हो रही है रील लाइफ और रियल लाइफ नर्गिस की। राजकुमार हिरानी की फिल्म संजू (अस्थाई टाइटल) अभिनेता संजय दत्त की आत्मकथा है। इस फिल्म में संजय दत्त की भूमिका अभिनेता रणबीर कपूर कर रहे हैं। चूंकि, फिल्म संजय दत्त के जीवन पर है, इसलिए फिल्म में उनसे जुड़े सभी महत्वपूर्ण किरदार रील लाइफ में भी होंगे। संजय दत्त और माँ नर्गिस का गहरा रिश्ता था। नरगिस अपने नशे के आदती बेटे के लिए बेहद चिंतित रहा करती थी। वह उस समय बेहद खुश हुई, जब संजय दत्त ने अपनी पहली फिल्म पूरी की। वह इस फिल्म को बेटे के साथ देखना चाहती थी, लेकिन उनकी यह इच्छा पूरी न हो सकी। नर्गिस का यह किरदार राजकुमार हिरानी निर्देशित फिल्म में भी काफी महत्वपूर्ण है। इस किरदार को बखूबी कोई सशक्त अभिनेत्री ही अंजाम दे सकती थी। आज की पीढ़ी की अभिनेत्रियों में मनीषा कोइराला ही ऐसी अभिनेत्री हैं, जो नर्गिस के चरित्र को परदे पर बखूबी कर सकती हैं। नर्गिस की तरह कभी कैंसर का शिकार रही मनीषा कोइराला ने फिल्म में नर्गिस की भूमिका को बड़ी शिद्दत से किया है। नर्गिस का दूसरा जिक्र उनकी फिल्म के रीमेक के कारण हो रहा है। सत्येन बोस निर्देशित फिल्म रात और दिन नर्गिस की आखिरी फिल्म थी। इस फिल्म के लिए नर्गिस को श्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला था। क्रिअर्ज की प्रेरणा अरोड़ा फिल्म रात और दिन को रीमेक करना चाहती थी। चूंकि, इस फिल्म का निर्माण नर्गिस के भाई अनवर हुसैन ने किया था, इसलिए इस फिल्म के रीमेक के लिए संजय दत्त की सहमति ज़रूरी थी। संजय दत्त को ऐतराज नहीं था कि रात और दिन को रीमेक किया जाए। लेकिन, उन्हें नर्गिस के किरदार को परदे पर उतारने के लिए प्रेरणा की पसंद माधुरी दीक्षित पर ज़रूर ऐतराज था। माधुरी दीक्षित के साथ संजय दत्त के गहरे संबंधों में उस समय दरार आ गई थी, जब बॉम्बे बम ब्लास्ट में संजय दत्त के फंसने के बाद, माधुरी दीक्षित ने उनसे किनारा कर लिया था। माधुरी पर संजय की सहमति न मिलने पर प्रेरणा अरोड़ा ने ऐश्वर्या राय बच्चन का नाम आगे किया। संजय दत्त इसके लिए तुरंत राजी हो गए। हालाँकि, संजय दत्त और ऐश्वर्या राय ने फिल्म शब्द में खूब गर्मागर्म दृश्य दिए थे। इस प्रकार से हिंदी फिल्म दर्शक इस साल लीजेंड अभिनेत्री नर्गिस को मनीषा कोइराला और ऐश्वर्या राय बच्चन के रूप में देखेंगे। संजय दत्त  बायोपिक २९ जून को रिलीज़ हो रही है।  

Tuesday 17 May 2016

अभिषेक बच्चन के साथ ज़ंजीर का रीमेक बनाना चाहते थे प्रकाश मेहरा

प्रकाश मेहरा की मृत्यु १७ मई २००९ को हुई थी।  उनके खाते में बिना अमिताभ बच्चन के हसीना मान   जाएगी, मेला, समाधी, एक कुंवारी एक कुंवारा, हाथ की सफाई, खलीफा,  ज्वालामुखी, आदि फ़िल्में दर्ज़ हैं। उन्होंने अमिताभ बच्चन के साथ ज़ंजीर, हेरा फेरी, मुकद्दर का सिकंदर, लावारिस, नमक हलाल और शराबी जैसी सुपर हिट फ़िल्में दी थी ।  हालाँकि, अमिताभ बच्चन के साथ फिल्म जादूगर के बाद  प्रकाश मेहरा कोई हिट फिल्म नहीं दे सके।  लेकिन, एक समय उन्होंने ज़ंजीर का रीमेक बनाने का इरादा किया था।  इस रीमेक फिल्म में इंस्पेक्टर विजय का किरदार अभिषेक बच्चन को करना था।  अमिताभ बच्चन उसके पिता अजय बने थे और प्राण को खान साहेब का किरदार करना था।  लेकिन, कुछ कारणों से यह फिल्म ऐलान से आगे नहीं बढ़ सकी।  इसके बाद २०१३ में प्रकाश मेहरा के बेटे अमित मेहरा ने कुछ दूसरे निर्माताओं के साथ  अपूर्व लखिया के निर्देशन में ज़ंजीर को रीमेक किया।  फिल्म में अमिताभ बच्चन, जया भादुड़ी बच्चन, प्राण और अजित वाला किरदार क्रमशः रामचरण तेज, प्रियंका चोपड़ा, संजय दत्त और प्रकाश  राज ने किया।  लेकिन, फिल्म बुरी  तरह से असफल हुई।

Thursday 1 October 2015

'एक रुका हुआ फैसला' सुनाने बैठे '१२ एंग्री मेन'

रेगीनाल्ड रोज ने एक ड्रामा लिखा था ट्वेल्व एंग्री मेन।  इस ड्रामे को १९५४ में टेलीप्ले के रूप में स्टूडियो वन द्वारा टेलीकास्ट किया गया था।  अगले ही साल इसे फीचर फिल्म के रूप में लिखा गया और १९५७ में इस पर एक फिल्म '१२ एंग्री मेन' बनाई गई।  इस फिल्म का डायरेक्शन सिडनी लूमेट ने किया था।  हेनरी फोंडा मुख्य भूमिका में थे।  '१२ एंग्री मेन' ऑस्कर पुरस्कारों की बेस्ट डायरेक्टर, बेस्ट पिक्चर और बेस्ट राइटिंग ऑफ़ अडाप्टेड स्क्रीनप्ले की केटेगरी में नॉमिनेट की गई।   फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर भी अच्छी सफलता मिली।  ३.४० लाख डॉलर में बनी इस फिल्म ने दस लाख डॉलर का बिज़नेस किया।  इस फिल्म की खासियत थी इसकी कहानी और एक कमरे में फिल्मांकन।  ९६ मिनट लम्बी इस फिल्म के केवल तीन मिनट के सीन ही कमरे के बाहर से थे।  इनमे से एक सीन कोर्ट रूम के बाहर का, एक जज का रिटायरिंग रूम और तीसरा ट्रायल रूम से सटे वाशरूम का था।  फिल्म में १२ सदस्यों की जूरी को एक मत से यह फैसला करना है कि अपराधी दोषी है या निर्दोष है।  इस फिल्म में किसी करैक्टर का भी नाम नहीं लिया गया था।  जर्मन टेलीविज़न चैनल जेडडीएफ ने इसका रूपांतरण प्रसारित किया।  एमजीएम ने १९९७ से इसी टाइटल के साथ फिल्म का टेलीविज़न रीमेक किया। '१३ एंग्री मेन' को कई भाषाओँ में अनुवादित कर, कई माध्यमों से प्रसारित किया गया।  इस फिल्म को रशियन और लेबनानी फिल्मकारों द्वारा भी फिल्म और डॉक्यूमेंट्री के रूप में दिखाया गया।   १२ एंग्री मेन का भारतीय सिनेमा के लिहाज़ से महत्व इस लिए है कि इस फिल्म पर बासु चटर्जी ने एक कोर्ट रूम ड्रामा फिल्म 'एक रुका हुआ फैसला' का निर्माण किया।  फिल्म की पटकथा रंजित कपूर के साथ खुद बासु चटर्जी ने लिखी थी।  'एक रुका हुआ फैसला' में जूरी मेंबर के रूप में दीपक क़ाज़िर, अमिताभ श्रीवास्तव, पंकज कपूर, एस एम ज़हीर, सुभाष उद्गाता, हेमंत मिश्रा, एम के रैना, के के रैना, अन्नू कपूर, सुबिराज, शैलेन्द्र गोयल और अज़ीज़ कुरैशी जैसे रंगमंच के सशक्त अभिनेता थे।  हिंदी रीमेक ११७ मिनट का था।  लेकिन, दर्शक एक कमरे में बैठे इन जूरी सदस्यों की भावनाओ,  वाद-विवाद, उत्तेजना को सांस रोक कर देख रहे थे। एक रुका हुआ फैसला को इतना प्रभावशाली इसके सक्षम एक्टरों ने बनाया ही था, बासु चटर्जी की लेखनी और कल्पनाशील निर्देशन ने भी फिल्म को उकताऊ होने से बचाया था।  पंकज कपूर इस फिल्म की जान थे।  फिल्म को इतना प्रभावशाली बनाने में इसके एडिटर कमल ए सहगल की धारदार कैंची की सराहना करनी चाहिए।  उन्होंने इस फिल्म की गति को शिथिल होने ही नहीं दिया था।  यहाँ एक बात।  '१२ एंग्री मेन' अमेरिका के जुडिशल सिस्टम में जूरी सिस्टम पर थी।  लेकिन, भारत में ऐसा कोई जूरी सिस्टम नहीं था।  इसके बावजूद एक रुका हुआ फैसला दर्शको को जूरी का फैसला सुनाने देखने के लिए मज़बूर करती थी।